कोरोना क़यामत के लिए हुकूमत की ना-अहली ज़िम्मेदार है

राम मंदिर के नाम पर वोट देने वाली जनता को भी हुकूमत से ज़्यादा उम्मीदें नहीं रखनी चाहिये।   कोरोना की दूसरी लहर क़यामत बन गई है। क़ब्रिस्तान में क़ब्र खोदनेवाले कम पड़ गए हैं। बल्कि मुंबई, भोपाल, इंदौर, लखनऊ और दिल्ली जैसे शहरों में क़ब्रिस्तान ही कम पड़ गए हैं, शमशान घाट की चिमनियाँ […]

रसूलुल्लाह (सल्ल०) की तौहीन की घटनाएँ इस्लाम मुख़ालिफ़ क़ौमों के ज़हनी दीवालियेपन और उनके हार मान लेने की पहचान हैं

हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) से मुसलमानों की अटूट मुहब्बत अबू-जहल की औलाद को आज भी गवारा नहीं।   इस्लाम में हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (सल्ल०) से मुहब्बत और अक़ीदत ईमान का लाज़मी हिस्सा है| एक मुसलमान का ईमान उस वक़्त तक मुकम्मल नहीं हो सकता जब तक कि वो सच्चे दिल से मुहम्मद (सल्ल०) से मुहब्बत न […]

ख़ास है तरकीब में क़ौमे-रसूले-हाशमी

हमारा असल मक़ाम ये है कि हम इस ज़मीन पर आसमानी सल्तनत के नुमाइंदे हैं   कोई एक शख़्स हो या पूरी क़ौम जब अपने मक़ाम और मर्तबे से ग़ाफ़िल होती है तो ख़ुद भी अपना कोई फ़ायदा नहीं करती और दूसरों को भी कोई फ़ायदा नहीं पहुँचा पाती है। भारतीय मुसलमान आज कल कुछ […]

वह शमा क्‍या बुझे जिसे रोशन ख़ुदा करे

तौहीने-क़ुरआन करने वालों के पसे परदा देखने की ज़रूरत है, मिल्‍लत को जज़्बाती मसलों में उलझाए रखना भी साजि़श का हिस्‍सा है   आज़ादी के बाद से ही भारत में मुसलमानों के साथ आए दिन हादसे पेश आते रहते हैं। सरकार किसी की भी हो सबका मक़सद एक ही रहा है कि मुसलमानों को जज़्बाती […]

“लिया जाएगा तुझसे काम दुनिया की इमामत का”

शिशु मन्दिर और विद्या मन्दिर के स्टूडेंट्स की तरह मदरसों के पास-आउट ऊँचे पदों पर क्यों नहीं पहुँच सकते? आम तौर पर मदरसों के बारे में ये मशवरा दिया जाता है कि मदरसे के लोगों को अपने सिलेबस में मॉडर्न एजुकेशन को शामिल करना चाहिये। किसी हद तक ये मशवरा ठीक भी है और इस […]

जी चाहता है नक़्शे-क़दम चूमते चलें

दक्षिण भारत के सर सय्यद और बाबा-ए-तालीम डॉ मुमताज़ अहमद ख़ाँ साहब हमारे लिये मशअले राह (मार्ग दर्शक) हैं। इन्सान को ख़ालिक़-ए-कायनात ने ज़मीन पर अपना नुमाइन्दा बनाया है। इसको तमाम मख़लूक़ात में सबसे बेहतर बनाया है। इसकी ख़िदमत के लिये पूरी कायनात को लगा दिया है। इसे अनगिनत सलाहियतों के साथ-साथ अनगिनत नेमतें बख़्शीं […]

मिल्‍लत में खा़मोश तालीमी इंक़लाब की आहट

(मसाइल के पैदा होने का सबब अगर जहालत है तो मसाइल का इलाज और हल, इल्‍म और तालीम है) तालीम को अगर मास्‍टर-की (Master-key) कहा जाए तो ग़लत न होगा। मसाइल पैदा होने की वजह अगर जहालत है तो उन मसाइल का इलाज और हल तालीम ही है। इस बात में किसी भी अक़्लमंद आदमी […]

उठ कि अब बज़्मे-जहाँ का और ही अन्दाज़ है

  उठ कि अब बज़्मे-जहाँ का और ही अन्दाज़ है कलीमुल हफ़ीज़ ज़मीन, सूरज और सितारों की गर्दिश से दिन-रात बदलते हैं। दिन-रात के बदलने से तारीख़ें बदलती हैं और तारीख़ें बदलने से महीने और साल बदलते हैं, यूँ साल पे साल गुज़र जाते हैं। वक़्त की रफ़्तार तेज़ होने के बावजूद सुनाई नहीं देती। […]

आँखों में तेरी आज ये आँसू फ़ुज़ूल हैं

(फासीवादी अपनी हुकूमत बचाने और लोगों की गर्दनें झुकाने के लिये कुछ भी कर सकते हैं) किसानों के मौजूदा विरोध प्रदर्शन को आधा साल पूरा हो रहा है। इससे पहले किसानों ने अपना विरोध-प्रदर्शन पंजाब में रेल की पटरी पर बैठकर और अलग-अलग जगहों पर काले क़ानूनों के ख़िलाफ़ जलसे जुलूस निकालकर किया था। उस […]

देश की अखण्डता का दारोमदार लोकतन्त्र के बाक़ी रहने पर है

(लोकतन्त्र की हिफ़ाज़त की ज़्यादा ज़िम्मेदारी बहुसंख्यक वर्ग पर आती है) देश ने 26 जनवरी को 72वाँ गणतन्त्र दिवस मनाया है, कोरोना महामारी की वजह से हालाँकि पहले जैसी धूमधाम तो नहीं रही, फिर भी रस्म व रिवाज के अनुसार सरकारी संस्थाओं में गणतन्त्र दिवस के कार्यक्रम आयोजित किये गए। अलबत्ता किसानों के आन्दोलन ने […]

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