तालीमी जंग में मिल्लत के तालीमी इदारे किस मोर्चे पर हैं

(ये दौर हथियारों से जंग का नहीं बल्कि क़लम और कर्सर की जंग का है) तालीम एक ऐसा टॉपिक है जिसपर जितना लिखा जाए कम है। यही हाल इल्म के फैलाव और उसकी गहराई का है कि जितना हासिल कर लिया जाए कम है। तालीम के साथ तालीमी नज़रियात भी चलते हैं। नज़रिया और फ़िक्र […]

मर्द वो हैं जो ज़माने को बदल देते हैं

(देश को परेशानियों भरी इस हालत को पहुँचाने में एक दो दिन का वक़्त नहीं, बल्कि एक लम्बा समय लगा है) देश के हालात को हर समझदार नागरिक अच्छी तरह जानता और समझता है। अब इसमें कोई शक नहीं है कि हमारे देश हिन्दुस्तान के लोकतान्त्रिक मूल्य पुरानी गाथा बनकर रह गए हैं। देश के […]

हुकूमत और मुस्लिम इदारों के बीच ताल्लुक़ात पर जमी बर्फ़

(ताल्लुक़ात में ठंडक या बातचीत के दरवाज़े बन्द हो जाना मसायल हल करने के बजाय मसायल पैदा करता है) मोदी जी की हुकूमत को सातवाँ साल चल रहा है। कहने को तो उन्होंने सबका साथ सबका विकास की बात कही थी बल्कि दूसरी मीक़ात में तो एक जुमला और जोड़ दिया था यानी सबका विश्वास। […]

कोरोना वैक्सीन के आने से पहले ही बहुत-सी ग़लतफ़हमियाँ फैल रही हैं

हमें उन एक्सपर्टस का शुक्र अदा करना चाहिये जिन्होंने कोरोना वैक्सीन तैयार की है कोरोना को आए पूरा एक साल हो चुका है। एक साल में दुनिया के अन्दर बहुत-से बदलाव आए हैं, इनमें पॉज़िटिव बदलाव भी हैं और नेगेटिव भी। अगर एक तरफ़ दुनिया में बेरोज़गारी में बढ़ोतरी हुई है, ग़रीबी ने और ज़्यादा […]

विवादित कृषि क़ानून वापस लेने से इज़्ज़त कम नहीं होगी

(यह काला क़ानून किसानों को उसी महाजनी दौर में वापस ले जाएगा, जहाँ से छोटू राम और लाल-बहादुर शास्त्री ने निकाला था) मौजूदा सरकार को सातवाँ साल लग गया है। ये सात साल देश में ग़ैर-यक़ीनी सूरते-हाल में गुज़रे हैं। हर दिन किसी अनहोनी के डर में बसर हुआ है। जब-जब मालूम हुआ है कि […]

अब जबकि ट्रम्प हार गए हैं तो ज़रूर दुनिया के अमन-पसन्दों ने राहत की साँसें ली होंगी।

उम्मीद है कि दुनिया में अमन का सूरज निकला होगा। माइनॉरिटी पर ज़ुल्म कम होंगे। ये मेरे ही नहीं ख़ुद अमरीकियों के अहसासात हैं। इसलिये कि उनके राष्ट्रपति काल में अमरीकियों ने पाया कम और खोया ज़्यादा है। ट्रम्प के बे-दलील रवैये की वजह अमरीका के सम्मान में कमी आई है। जोज़फ़ बाइडन के पहले […]

एक उम्मी लक़ब का ये ऐजाज़ है, आदमी को मिली इल्म की रौशनी

नबी करीम की बुनियादी हैसियत एक मुअल्लिम की है। टीचर्स को इस पहलु से रसूल (सल्ल) की सीरत को पढ़ना चाहिये रबीउल-अव्वल का चाँद नज़र आते ही मुस्लिम दुनिया ख़ास तौर पर हिन्दुस्तान और पाकिस्तान में मीलादुन्नबी के जलसों की तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं। अब तो मुबारकबाद देने का सिलसिला भी शुरू हो गया […]

आख़िर बिहार को दुनिया में एहतिराम का मक़ाम कब मिलेगा?

बिहार के पढ़े-लिखे तबक़े की एक बड़ी तादाद दिल्ली में रहती है, उनकी ज़िम्मेदारी है कि वो आम लोगों की रहनुमाई करें।   बिहार का ज़िक्र आते ही जो तस्वीर दिल-दिमाग़ में उभरती है वो बड़ी दयनीय होती है। ग़ुरबत, जहालत, बीमारियाँ, बाढ़, तूफ़ान और न जाने कौन-कौन सी मुसीबतें हैं जो आए दिन बिहार […]

हम तो समझे थे कि लाएगी फ़राग़त तालीम

तरबियत के बग़ैर तालीम जहालत नहीं जाहिलियत है हर तरफ़ तालीम का शोर है। कॉलेज, स्कूल मदरसे और पाठशालाएँ हैं। बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटियाँ हैं। दुनिया भर में हर साल लाखों प्रोफ़ेसर, इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, जज, टीचर्स, उलमा, और ब्यूरोक्रेट पैदा हो रहे हैं। जहालत के ख़ात्मे के लिये बहुत-से अभियान चलाए जा रहे हैं। अरबों-खरबों डॉलर […]

बापू! क्या तुम्हें अपने देस का हाल मालूम है?

बापू! तुम हर साल अपने जन्म दिन पर बहुत याद आते हो। मगर केवल एक दिन के लिये। बापू!क्या तुम्हें मालूम है कि हिन्दुस्तान का हाल क्या है? वही देस जिसके लिये तुमने न जाने कितने पापड़ बेले थे। अपना ऐश व आराम खोया था, बल्कि अपनी जान तक क़ुर्बान कर दी थी। तुम्हें ज़रूर […]

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