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उठ बाँध कमर क्यों डरता है?

ज़मीन, सूरज और सितारों की गर्दिश से दिन-रात बदलते हैं। दिन-रात के बदलने से तारीख़ें बदलती हैं और तारीख़ें बदलने से महीने और साल बदलते हैं, यूँ साल पे साल गुज़र जाते हैं। वक़्त की रफ़्तार तेज़ होने के बावजूद सुनाई नहीं देती। बुज़ुर्ग कह गए कि वक़्त दबे पाँव निकल जाता है। कल के […]

*मन्दिर के संगे-बुनियाद से मुसलमानों को मायूस होने की नहीं बल्कि एहतिसाब (आत्म निरीक्षण) की ज़रूरत है।*

मुसलमानों का दूसरा जुर्म ये है कि उन्होंने देशवासियों को इस्लाम की दावत इस तरह नहीं दी जिस तरह देना चाहिये थी, बल्कि वो इस्लाम क़बूल करने के रास्ते में रुकावट बन गए। मुस्लिम बादशाहों ने सरहदों की हिफ़ाज़त और उसके फैलाव पर तो ख़ूब तवज्जोह दी लेकिन इस्लाम के प्रचार-प्रसार के लिये कोई ख़ास […]

जो अब्र यहाँ से उठेगा वो सारे जहाँ पर बरसेगा

(यूनिवर्सिटी के सौ साल पूरे होने पर ये देखना चाहिये कि सौ साल में कितने सर सय्यद रह० पैदा हुए और कितनी यूनिवर्सिटियाँ क़ायम हुईं)   अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को क़ायम हुए एक सदी हो चुकी है। हम जानते हैं कि 1875 में मुहम्मडन एंग्लो ओरिएण्टल (एम ए ओ) कॉलेज एक स्कूल की शक्ल में […]

लॉक-डाउन में ऑन-लाइन तालीम : इमकानात व मसायल

तालीम के चिराग़ जलाते हुए चलो   लॉक-डाउन में ज़िन्दगी के तमाम शोबे मुतास्सिर हुए हैं। लेकिन तालीम का शोबा सबसे ज़्यादा मुतास्सिर हुआ है और अभी दूर-दूर तक स्कूल खोलने के इशारे तक नहीं मिल रहे हैं। तालीम से वाबस्ता करोड़ों लोग बेरोज़गार हो गए हैं। बच्चे सबक़ भूल रहे हैं। कहते हैं कि […]

परिंदे हाथियों को हरा सकते हैं, मायूस न हो, इरादे न बदल तक़दीर

हम हिन्दुस्तानियों के लिये ये गर्व की बात है कि यहाँ श्री राम की जन्म भूमि है। हिन्दुस्तानी मुसलमान श्री राम से ज़र्रा बराबर नफ़रत नहीं करते बल्कि उनका सम्मान करते हैं। उनकी शान में गुस्ताख़ाना अलफ़ाज़ तक कहने से इस्लाम ने उन्हें रोका है।* इसके बावजूद मन्दिर की आधारशिला के फ़ंकशन को जिस अन्दाज़ […]

बराहीमी नज़र पैदा मगर मुश्किल से होती है

अरबी महीना ज़िल-हज्ज का चाँद नज़र आते ही मुस्लिम समाज में हज और क़ुर्बानी की चर्चा शुरू हो जाती है, जो लोग हज की सआदत (सौभाग्य) पा चुके हैं उनकी नज़रों में सारे दृश्य घूमने लगते हैं। क़ुर्बानी के जानवरों के बाज़ार सजने लगते हैं, गली-कूचों से बकरों की मैं-मैं की आवाज़ें कानों में रस […]

मिल्लत के आफ़ताब ने रौशन किया जहाँ

ओडिशा के शुऐब आफ़ताब ने NEET के इम्तिहान में पहली पोज़िशन हासिल करके जहालत के अँधेरों को चैलेंज कर दिया है हमारे देश में कुछ एग्ज़ाम्स ऐसे होते हैं जिनके नतीजों पर देश-भर की नज़रें जमी होती हैं। जिन स्टूडेंट्स ने वो एग्ज़ाम्स दिये होते हैं, रिज़ल्ट के इन्तिज़ार में उनकी साँसें रुकना तो नेचुरल […]

मुसलमानों की बदहाली के लिए इमाम, पेशवा व सियासी लीडर ज़िम्मेदार

राम-मन्दिर की आधार शिला के बाद हिन्दुस्तानी मुसलमान ख़ुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। हिन्दुस्तान की तहरीके-आज़ादी के लिये क़दम-क़दम पर अपने त्याग और क़ुर्बानी के निशानात देख रहे हैं, उन्हें दिल्ली से लाहौर तक के हर पेड़ पर मुसलमान मुजाहिदीने-आज़ादी की लटकी हुई लाशें नज़र आ रही हैं, यतीमों की आहें और […]

लॉक-डाउन में ऑन-लाइन तालीम : इमकानात व मसायल

लॉक-डाउन में ज़िन्दगी के तमाम शोबे मुतास्सिर हुए हैं। लेकिन तालीम का शोबा सबसे ज़्यादा मुतास्सिर हुआ है और अभी दूर-दूर तक स्कूल खोलने के इशारे तक नहीं मिल रहे हैं। तालीम से वाबस्ता करोड़ों लोग बेरोज़गार हो गए हैं। बच्चे सबक़ भूल रहे हैं। कहते हैं कि ज़रूरत ईजाद की माँ है। जब ज़रूरत […]

हम तो समझे थे कि लाएगी फ़राग़त तालीम

हर तरफ़ तालीम का शोर है। कॉलेज, स्कूल मदरसे और पाठशालाएँ हैं। बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटियाँ हैं। दुनिया भर में हर साल लाखों प्रोफ़ेसर, इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, जज, टीचर्स, उलमा, और ब्यूरोक्रेट पैदा हो रहे हैं। जहालत के ख़ात्मे के लिये बहुत-से अभियान चलाए जा रहे हैं। अरबों-खरबों डॉलर सालाना ख़र्च किया जा रहा है। कॉन्फ़्रेंसें और […]

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